एकादशी व्रत कथा|एकादशी के दिन नहीं करना चाहिए ये 13 काम
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| 2020 Ekadashi |
हिंदू धर्म में एकादशी या ग्यारस एक महत्वपूर्ण तिथि है। एकादशी व्रत की बड़ी महिमा है। एक ही दशा में रहते हुए अपने आराध्य देव का पूजन एवं वंदन करने की प्रेरणा देने वाला व्रत एकादशी व्रत कहलाता है। पद्म पुराण के अनुसार स्वयं महादेव ने नारद जी को उपदेश देते हुए कहा था, एकादशी महान पुण्य देने वाली होती है। कहा जाता है कि जो मनुष्य एकादशी का व्रत रखता है उसके पितृ और पूर्वज कुयोनि को त्याग स्वर्ग लोक चले जाते हैं।
क्या है एकादशी: हिंदू पंचांग की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। एकादशी संस्कृत भाषा से लिया गया शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘ग्यारह’। हर महीने में एकादशी दो बार आती है, एक शुक्ल पक्ष के बाद और दूसरी कृष्ण पक्ष के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैं। प्रत्येक पक्ष की एकादशी का अपना अलग महत्व है।
एकादशी का महत्व: पुराणों के अनुसार एकादशी को ‘हरी दिन’ और ‘हरी वासर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को वैष्णव और गैर-वैष्णव दोनों ही समुदायों द्वारा मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि एकादशी व्रत हवन, यज्ञ, वैदिक कर्म-कांड आदि से भी अधिक फल देता है। इस व्रत को रखने की एक मान्यता यह भी है कि इससे पूर्वज या पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। स्कन्द पुराण में भी एकादशी व्रत के महत्व के बारे में बताया गया है। जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है उनके लिए एकादशी के दिन गेहूं, मसाले और सब्जियां आदि का सेवन वर्जित होता है।
एकादशी व्रत का नियम : एकादशी व्रत करने का नियम बहुत ही सख्त होता है जिसमें व्रत करने वाले को एकादशी तिथि के पहले सूर्यास्त से लेकर एकादशी के अगले सूर्योदय तक उपवास रखना पड़ता है। यह व्रत किसी भी लिंग या किसी भी आयु का व्यक्ति स्वेच्छा से रख सकता है। एकादशी व्रत करने की चाह रखने वाले लोगों को दशमी (एकादशी से एक दिन पहले) के दिन से कुछ जरूरी नियमों को मानना पड़ता है। दशमी के दिन से ही श्रद्धालुओं को मांस-मछली, प्याज, दाल (मसूर की) और शहद जैसे खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। रात के समय भोग-विलास से दूर रहते हुए, पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
एकादशी के दिन सुबह दांत साफ़ करने के लिए लकड़ी का दातून इस्तेमाल न करें। इसकी जगह आप नींबू, जामुन या फिर आम के पत्तों को लेकर चबा लें और अपनी उंगली से कंठ को साफ कर लें। इस दिन वृक्ष से पत्ते तोड़ना भी वर्जित होता है इसीलिए आप स्वयं गिरे हुए पत्तों का इस्तेमाल करें और यदि आप पत्तों का इंतज़ाम नहीं कर पा रहे तो आप सादे पानी से कुल्ला कर लें। स्नान आदि करने के बाद आप मंदिर में जाकर गीता का पाठ करें। सच्चे मन से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जप करें। भगवान विष्णु का स्मरण और उनकी प्रार्थना करें। इस दिन दान-धर्म की भी बहुत मान्यता है इसीलिए अपनी यथाशक्ति दान करें।
एकादशी के अगले दिन को द्वादशी के नाम से जाना जाता है। द्वादशी दशमी और बाक़ी दिनों की तरह ही आम दिन होता है। इस दिन सुबह जल्दी नहाकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और सामान्य भोजन को खाकर व्रत को पूरा करते हैं। इस दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न और दक्षिणा आदि देने का रिवाज़ है। ध्यान रहे कि श्रद्धालु त्रयोदशी आने से पहले ही व्रत का पारण कर लें। इस दिन कोशिश करनी चाहिए कि एकादशी व्रत का नियम पालन करें और उसमें कोई चूक न हो।
एकादशी व्रत का भोजन: शास्त्रों के अनुसार श्रद्धालु एकादशी के दिन ताजे फल, मेवे, चीनी, कुट्टू, नारियल, जैतून, दूध, अदरक, काली मिर्च, सेंधा नमक, आलू, साबूदाना और शकरकंद का प्रयोग कर सकते हैं। एकादशी व्रत का भोजन सात्विक होना चाहिए। कुछ व्यक्ति यह व्रत बिना पानी पिए संपन्न करते हैं जिसे निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है।
एकादशी को क्या न करें-:
वृक्ष से पत्ते न तोड़ें।
घर में झाड़ू न लगाएं। ऐसा इसीलिए किया जाता है क्यूंकि घर में झाड़ू आदि लगाने से चीटियों या छोटे-छोटे जीवों के मरने का डर होता है और इस दिन जीव हत्या करना पाप होता है।
बाल नहीं कटवाएं।
ज़रूरत हो तभी बोलें। कम से कम बोलने की कोशिश करें।
एकादशी के दिन चावल का सेवन भी वर्जित होता है।
किसी का दिया हुआ अन्न आदि न खाएं।
मन में किसी प्रकार का विकार न आने दें।
यदि कोई फलाहारी है तो वे गोभी, पालक, शलजम आदि का सेवन न करें। वे आम, केला, अंगूर, पिस्ता और बादाम आदि का सेवन कर सकते है।
जानिए 2020 में कब कौन सी एकादशी होंगी
सोमवार, 06 जनवरी पौष पुत्रदा एकादशी
सोमवार, 20 जनवरी षटतिला एकादशी
बुधवार, 05 फरवरी जया एकादशी
बुधवार, 19 फरवरी विजया एकादशी
शुक्रवार, 06 मार्च आमलकी एकादशी
गुरुवार, 19 मार्च पापमोचिनी एकादशी
शनिवार, 04 अप्रैल कामदा एकादशी
शनिवार, 18 अप्रैल वरुथिनी एकादशी
सोमवार, 04 मई मोहिनी एकादशी
सोमवार, 18 मई अपरा एकादशी
मंगलवार, 02 जून निर्जला एकादशी
बुधवार, 17 जून योगिनी एकादशी
बुधवार, 01 जुलाई देवशयनी एकादशी
गुरुवार, 16 जुलाई कामिका एकादशी
गुरुवार, 30 जुलाई श्रावण पुत्रदा एकादशी
शनिवार, 15 अगस्त अजा एकादशी
शनिवार, 29 अगस्त परिवर्तिनी एकादशी
रविवार, 13 सितंबर इन्दिरा एकादशी
रविवार, 27 सितंबर पद्मिनी एकादशी
मंगलवार, 13 अक्टूबर परम एकादशी
मंगलवार, 27 अक्टूबर पापांकुशा एकादशी
बुधवार, 11 नवंबर रमा एकादशी
बुधवार, 25 नवंबर देवुत्थान एकादशी
शुक्रवार, 11 दिसंबर उत्पन्ना एकादशी
शुक्रवार, 25 दिसंबर मोक्षदा एकादशी
एकादशी के दिन नहीं करना चाहिए ये 13 काम, बन सकते हैं पाप के भागी
एकादशी व्रत-उपवास को हिन्दू धर्म में बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार संपूर्ण साल में 24 एकादशी व्रत आते हैं। इन 24 एकादशी का व्रत को करने वालों को दशमी के दिन निम्नलिखित वस्तुओं का त्याग करना चाहिए।
अगर आप एकादशी व्रत कर रहे हैं और इन वस्तुओं का त्याग नहीं करेंगे तो उपवास का संपूर्ण फल आपको प्राप्त नहीं हो पाएगा। आइए जानें क्या वर्जित है ग्यारस/एकादशी के व्रत के दिनों में...
करें इन चीजों का त्याग : -
1. इस व्रत में नमक, तेल, चावल अथवा अन्न वर्जित है।
2. मांस खाना।
3. मसूर की दाल का त्याग।
4. चने का शाक।
5. कोदों का शाक।
6. मधु (शहद) ।
7. दूसरे का अन्न।
8. दूसरी बार भोजन करना।
9. स्त्री प्रसंग।
10. व्रत वाले दिन जुआ नहीं खेलना चाहिए।
11. इस दिन पान खाना, दातुन करना, दूसरे की निंदा करना तथा चुगली करना एवं पापी मनुष्यों के साथ बातचीत सब त्याग देना चाहिए।
12. इस दिन क्रोध, मिथ्या भाषण का त्याग करना चाहिए।
13. कांसे के बर्तन में भोजन करना।
कामदा एकादशी, पापमोचनी एकादशी, वरूथिनी एकादशी, कमला एकादशी, मोहिनी एकादशी, अपरा एकादशी, रंगभरनी एकादशी, निर्जला एकादशी, योगिनी एकादशी, देवशयनी एकादशी, पवित्रा एकादशी, अजा एकादशी, पद्मा एकादशी, इन्दिरा एकादशी, पापांकुशा एकादशी, रमा एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी, उत्पन्ना एकादशी, मोक्षदा एकादशी, सफला एकादशी, पुत्रदा एकादशी, षटतिला एकादशी, जया एकादशी, विजया एकादशी, आमलकी एकादशी, प्रमोदिनी एकादशी
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